कभी मोटापे से हुआ करते थे परेशान, गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा के उतार चढ़ाव भरे जीवन से हम सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए

By : Arshad  |  Updated On : 09 Aug, 2021

कभी मोटापे से हुआ करते थे परेशान, गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा के उतार चढ़ाव भरे जीवन से हम सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए.

एथलेटिक्स में पहली बार भारत को स्वर्ण पदक जिताकर नीरज चोपड़ा को हर भारतीय कभी नहीं भूल सकता. 121 साल से  भारत जिस मेडल की तलाश में था नीरज ने उसे पूरा कर दिया. वैसे तो हर किसी की ज़िन्दगी में उतार चढ़ाव आते हैं पर इन्होनें अपने संघर्ष और मेहनत से सबको बता दिया कि आप अपने सपने को जरूर पूरा कर सकते हैं.

बचपन में लोग उनके मोटापे का काफी मज़ाक उड़ाया करते थे.

नीरज चोपड़ा अपने बचपन में काफी मोटे थे, जिससे गाँव के उनके साथी तथा अन्य लोग उनका काफी मज़ाक उड़ाया करते थे, वे 13 साल की उम्र में अपने चाचा के साथ स्टेडियम जाकर दौड़ लगाते थे तथा अन्य खेल भी खेला करते थे, वहीँ पर उन्होंने खिलाड़ियों को भाला फेंकते हुए देखा था, तबसे उनका सपना जेवलिन थ्रो का बन गया,नीरज का जन्‍म हरियाणा राज्य के पानीपत जिले के एक छोटे से गाँव खान्द्रा में हुआ इनके पिता सतीश पेशे से एक छोटे से किसान तथा माता सरोज देवी गृहणी हैं, इन्होनें अपनी शुरूआती पढ़ाई पानीपत से ही की अपनी प्रारंभिक पढ़ाई को पूरा करने के बाद नीरज चोपड़ा ने चंडीगढ़ से अपनी BBA की डिग्री हासिल की.

ओलिंपिक से पहले भी कई मेडल और रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं नीरज.

नीरज नें राष्ट्रीय स्‍तर पर कई मेडल अपने नाम किए, पोलैंड के बाइडगोस्ज़्ज़ में 2016 आईएएएफ विश्व अंडर -20 चैम्पियनशिप में विश्व जूनियर रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज किया, तथा साल  2016 में, दक्षिण एशियाई खेलों में 82.23 मीटर की जेवलिन थ्रो के साथ भारतीय राष्ट्रीय रिकॉर्ड दर्ज किया था, वर्ष  2018 में, वह एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों में जवेलिन में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने थे. ऐसे प्रदर्शन के बावजूद भी वे 2016 के ग्रीष्मकालीन ओलिंपिक में वे स्थान पाने में विफल रहे क्योंकि अर्हता प्राप्त करने के लिए अंतिम तिथि  11 जुलाई थी.