हरसिंगार : आर्थराइटिस के लिए अमृत है पारिजात का पौधा.

By : FiveMinute  |  Updated On : 8 hours ago

हरसिंगार : आर्थराइटिस के लिए अमृत है पारिजात का पौधा - Harsingar benefits in arthritis

हारसिंगार या पारिजात (Nyctanthes arbor-tristis) को देवताओं से प्राप्त अमृत के समान माना गया है। हरसिंगार के फूल को देवी देवताओ को चढाने के लिए सबसे पवित्र माना गया  है। पारिजात के फूल रात में खिलते हैं और यही कारण है कि उन्हें रात की चमेली भी कहा जाता है। बंगाली में, इसे 'शेफाली' भी कहते है। श्रीलंका में, इसे सेपालिका के रूप में जाना जाता है। भागवत पुराण, महाभारत और विष्णु पुराण के अनुसार, समुंद्री मंथन के परिणामस्वरूप पारिजात के फूलों का उत्पाद हुआ था।

 

वेदो और पुराणों में हरसिंगार का जिक्र होना यह दर्शाता है की यह कोई साधारण पौधा नहीं है।  इस लेख में हम जानेंगे की हरसिंगार का पौधा इंसानो के लिए कितना उपयोगी है और इस पौधे के फूल, पत्ते, और बीज से प्रत्येक इंसान को कितना लाभ मिल सकता  है।  सबसे पहले हम यह जानेंगे की हरसिंगार का पत्ता आर्थराइटिस के लिए कितना उपयोगी है। 

 

गठिया (Arthritis ) में हरसिंगार के फायदे - Harsingar leaves for Arthritis. 

Harsingar leaves for arthritis

 

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आर्थराइटिस यानि की गठिया का रोग बहुत ही पीड़ादायक रोग है। यह बीमारी शरीर के सारे जोड़ो में सूजन के साथ साथ दर्द पैदा करता है। जिसके कारण रोगी का चलना फिरना बंद हो जाता है। यह बीमारी ख़ास कर के घुटनो, हथेली, कंधो के जोड़, कमर में असर दिखता है। शरीर के अन्य जोड़ो में भी इसका प्रभाव देखने को मिलता है। समय के साथ इसका इलाज न हो तो शरीर के अंग टेढ़े भी होने लगते है। 
आम तौर पर इस बीमारी का इलाज एलोपैथिक में असंभव है, अलोपेथिक दवाईयों से इसे कण्ट्रोल किया जा सकता है, लेकिन आर्थराइटिस को कण्ट्रोल में रखने के लिए हमें जिंदगी भर दवाईयों पर निर्भर रहना पड़ता है। और इस बात से आप भली भाती अवगत होंगे की अलोपेथिक दवाईया हमारे शरीर के लिए कितना नुकसानदेह होती है। इन दवाईयों को रोजाना खाने से आपको दर्द से थोड़ा राहत तो मिल सकती है लेकिन इससे आपको ह्रदय, लिवर किडनी जैसे नाजुक जगहों पर नुक्सान भी हो सकता है।

 

हारसिंगार में छिपा है गठिया का इलाज - Parijat use in arthritis

जी हाँ, आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है की पारिजात के पौधे में गठिया को जड़ से ख़त्म करने का उपाय छिपा हुआ है। न केवल गठिया बल्कि शरीर को नुक्सान पहुंचने वाली अन्य घातक बीमारियों  इलाज भी इस पौधे में है। शायद इसीलिए पारिजात के पौधे को अमृत के समान माना गया है। 
पुराने से पुराने आर्थराइटिस (Arthritis) को हम कुछ दिनों के भीतर हरसिंगार के पत्ते से ठीक कर सकते है। हरसिंगार के पत्तों में बेंजोइक एसिड, फ्रुक्टोज, ग्लूकोज, कैरोटीन, एस्कॉर्बिक एसिड जैसे कई पोषक तत्व होते हैं जो गठिया के इलाज में उपयोगी होते हैं।

 

हारसिंगार की पत्तियों का उपयोग कैसे करें- How to use Harsingar leaves for joint pain

हारसिंगार के 6 से 7 पत्ते लेकर उसे सिलबट्टे में पीस ले। अच्छे से पीसने के बाद लेप को एक बड़े कटोरे में रख ले, कटोरा इतना बड़ा होना चाहिए की उसमें एक गिलास पानी आ जाये। पानी डालने के बाद घोल को इतनी देर तक उबाले जब तक वह उबल कर आधी न हो जाए। इस प्रकार बने काढ़े को आप रोज खली पेट पिए। इस प्रक्रिया को आप लगभग अगले डेढ़ महीने तक दोहराये। इसका असर आपको कुछ ही दिनों में देखने को मिलेगा। और अगले कुछ दिनों में आप ये देखेंगे की आपका दर्द पूरी तरह से गायब हो जायेगा।

 

पारिजात के फूल के फायदे - Benefits of Parijat flower.

Parijat flowers benefits

हारसिंगार का फूल  सफ़ेद होता है, इसके निचला हिस्सा नारंगी रंग का होता है। यह फूल केवल रात में खिलता है। सुबह होते ही हारसिंगार का फूल झड़ जाता है। हारसिंगार के फूल में ग्लाकोसाइड्स होता है और इससे गुणकारी आवश्यक ऑयल निकाले जाते हैं जो त्वचा के विभिन्न रोगो के इलाज में बहुत असरदार होते है। इसके फूल से बने पेस्ट को चेहरे में लगाने से आपके मुहासे गायब हो जायेंगे। शरीर के किसी भी भाग में कितना ही पुराने दाद को यह जड़ से ख़त्म कर सकता है। 

पारिजात के पौधे में शरीर में होने वाली कई बीमारियों को ठीक करने की क्षमता मौजूद है। जिसे हम आपके लिए अगले पोस्ट में लेकर आएंगे। इस पोस्ट में दि जानकारी आपको कैसी लगी, हमें कमेंट कर के जरूर बताये, ताकि हम ऐसी ही और सारी जानकारी आपके लिए लाते रहे। 

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